गढ़वा की विभिन्न गांवों में कर्मा पूजा की पर्व बहुत ही धूम धाम से मनाया गया।
गढ़वा के विभिन्न गांवो और कस्बों में प्राकृतिक का पर्व एवं भाई बहन के अटूट रिश्ता और विश्वास का प्रतीक कर्मा का पर्व मनाया गया
जिस में बहने अपने भाई के सुख और दीर्घायु के लिए कामना की। इस पर्व में बहन अपने भाइयों के लिए 24 घंटे के लिए उपवास रखती है। और उनकी लंबी उम्र की कामना करती है
इस दौरान कई स्थानों पर विशेष रूप से आयोजन किया जाता है। और जैसे ही शाम होती है महिलाएं एवं युवतियां कर्म की वृक्ष लगा कर उसकी पूजा करती हैं एवं पारंपरिक प्राकृतिक नाच गान करती है।
कर्म पूजा का महत्व
यह प्राकृतिक का पर्व जिसमें कर्म वृक्ष की पूजा की जाती है। और अच्छी फसल एवं समृद्धि की कामना की जाती है।
संस्कृति उत्सव
माने तो यह पर वह महत्वपूर्ण रूप से आदिवासी समाज का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है और पूरे झारखंड में या त्यौहार मनाया जाता है
गढ़वा के विभिन्न प्रखंडों में आदिवासी एवं गैर आदिवासी समाज के लोग भी बहुत ही उत्साह पूर्वक इस पर्व को मनाते है और भाई की लंबी उम्र की कामना करते है। कर्मा की पूजा पारंपरिक कार्यक्रम गढ़वा के कई गांव में देखा गया जैसे की मेराल, चिरौंजीय, अटवाला मझिआंव, कोरवाडीह इत्यादि गांवों में हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया।